Hindi Story For Kids with Moral बच्चों की कहानियां 

 

 

 

Hindi Story For Kids एक शहर में रामगोविंद नामक एक व्यक्ति थे. वे अध्यापन का कार्य करते थे और इसी से उनका जीवन – यापन होता था.    

 

 

 

 एक दिन जब वे विद्यालय जा रहे थे तो उनकी पत्नी ने कहा ” आज घर में खाना कैसे बनेगा . घर में केवल एक मुठ्ठी चावल है “. रामगोविंद जी ने एक नजर पत्नी की और देखा और बिना कुछ बोले चल दिए.      

 

 

 

शाम को जब वे वापस लौट कर आये तो भोजन के समय थाली में थोड़े उबले हुए चावल और शाक देखा . यह देखकर अपनी पत्नी से बोले ” यह स्वादिष्ट शाक किस चीज का बना है “.
 
 
 
 
 

 

 
मैंने सुबह जब आपसे भोजन के विषय में पूछा था तो आपकी दृष्टि इमली के पेड़ की तरफ गयी थी . मैंने उसी के पत्ते से शाक बनाया है….पत्नी ने जवाब दिया.

 

 

 

रामगोविंद जी ने बड़ी ही निश्चिन्त भाव से कहा अगर इमली के पत्तों का शाक इतना स्वादिष्ट होता है तो फिर हमें भोजन की कोई चिंता ही नहीं रही.
 
 
 
 
 
 
 
 
इसी बीच शहर के एक रईस को रामगोविंद की गरीबी का पता चला तो वह स्वयं उनके घर आया और उन्हें मध्य शहर में रहने के लिए कहा . लेकिन रामगोविंद जी मना कर दिया.
 

 

 

 

इस पर रईस बहुत हैरान हुआ और उसने हाथ जोड़कर कहा कि आप विद्यार्थियों को शिक्षा देते हैं. उन्हें उचित मार्ग दिखाते हैं और आप इस तरह रहे तो यह उचित नहीं है. आप बताएं , आपको किस चीज की आवश्यकता है.
 
 
 
 
 
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इस पर रामगोविंद जी बोले अब इसका हाल तो मेरी धर्मपत्नी ही बता सकती है. अब रईस ने रामगोविंद जी की पत्नी से वही सवाल किया तो उन्होंने जवाब दिया ” अभी हमें किसी तरह का अभाव नहीं है. अभी हमारे वस्त्र इतने नहीं फटे हैं कि पहने नहीं जा सकते .
 
 
 
 

 

घर भी इतना नहीं टूटा है कि इसे छोड़ा जा सके और जब तक मेरे हाथों की चूड़िया सलामत हैं मुझे किसी चीज का अभाव नहीं हो सकता है और अगर सीमित संसाधनों में भी संतोष की अनुभूति हो तो जीवन आनंदमय हो जाता है. रईस को बात समझ में आ गयी और उसके बाद वह भी सादा जीवन व्यतीत करने लगा.
 
 
 

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2- रामप्रताप और श्यामप्रताप नाम के मित्र थे. दोनों बहुत ही परम मित्र थे. अपने हर सुख दुःख को आपस में बात लेते थे. वे उम्र के उस पड़ाव पर पहुँच चुके थे जहां प्यार, स्नेह , सम्मान मिलना बहुत म लोगों को नसीब होता  है.     
 
 
 
 
 
रामप्रताप ने तो जवानी के दिनों में कुछ पैसे  रख  थे जिसके लालच में उसकी सेवा हो  थी …..लेकिन शामप्रताप ने जवानी के दिनों में खूब पैसे  उडाये ….उसने पैसे नहीं बचाए …फलस्वरूप उसका बुढापा कष्टों से कट रहा था.

 

 

 

 

पैसों के कारण रामप्रताप की परिवार पर पूरी पकड़ थी..वहीँ श्यामप्रताप की स्थिति ठीक उसके विपरीत थी…किसी ने ठीक ही कहा है की जैसा पेड़ बोवोगे..वैसा ही फल खाओगे.

 

 

 

 

यह कहावत आज श्यामप्रताप पर चरितार्थ हो रही थी. इससे श्यामप्रताप बहुत दुखी रहने लगा था. जब बहु और बेटे उसी ताना मारते तो उसका दुःख और भी बढ़ जाता.

 

 

 

 

 एक दिन जब दोनों मित्र मिले तो दोनों ने अपनी सुख दुःख कही….श्यामप्रताप की स्थिति पर रामप्रताप को बड़ा दुःख हुआ….उसने कहा कि मैं तुम्हे पहले भी समझाया था कि बुढ़ापे के लिए कुछ पैसे रख लो , लेकिन तुमने मेरी एक ना सुनी लो अब भुगतो.          

 

 

 

भैया रामप्रताप अब जो होना था वह तो हो गया….अब कुछ उपाय बताओ…अब और सहा नहीं जाता….श्यामप्रताप बहुत ही दुखी होकर बोला. 

 

 

 

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एक काम करो…कुछ पत्थर के सिक्के इकठ्ठा कर लो…राम प्रताप बात पूरी   करता कि श्याम्प्रताप ने उसे टोकते हुए कहा पत्थर के सिक्के इसका क्या तात्पर्य है.    

 

 

 

 
अरे तुम एक काम करो कुछ छोटे छोटे पत्थर ले लो और उसे  रात को किसी बरतन में रखकर खनखनाया  करो….इससे तुम्हारे बहु बेटे समझेंगी कि तुम्हारे पास बहुत सारे सिक्के हैं. फिर वी तुम्हारी सेवा करेंगे और हर कहा मानेंगे.      
 
 
 
 
 
 
श्यामप्रताप ने वही किया और उसकी तक़दीर बदल गयी. जब वह रात को पत्थर के सिक्के को बरतन में रखकर बजाया तो उसकी बहु को विश्वास नहीं हुआ…वह दौड़कर अपने   पति के पास  और साड़ी बात बतायी .      
 
 
 
 
 
इस पर उसके   विश्वास नहीं हुआ तो श्यामप्रताप की बहु ने कहा कि चलो खुद ही सुन लो कि ससुर जी  पैसे गिन रहे हैं कि नहीं…..जब वह पति के साथ आई तो वैसी ही आवाज आ रही थी….यह सुनकर श्यामप्रताप के बेटे ने आवाज लगाईं ” बाबूजी “.        
 
 
 
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ठीक उसी समय श्यामप्रताप नेपत्थर के सिक्के गिनना बंद कर दिया और सोने  का नाटक    करने लगा. अब तो उसके बेटे और बहु को यह विश्वास हो कि श्यामप्रताप के पास पैसा है. अब उसकी खूब सेवा होने लगी .        
 
 
 
 
 
एक बार जब वह बहुत बीमार पडा तो उसके बेटे ने अच्छे से दवा करवाई ….खूब सेवा की…लेकिन शायद श्यामप्रताप का समय खत्म हो गया था. वह इस दुनिया को छोड़ चुका था. दाह संस्कार के बाद एक दिन बहु बेटे ने सोचा कि चलो   देखते हैं कि बापू ने कितने पैसे रखे हैं.        
 
 
 
 
 

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आवाज तो बहुत आती थी…पैसे ज्यादा ही होने चाहिए….श्यामप्रताप की बहु मन ही मन खुश होते हुए सोच रही थी. दोनों ने पूरा कमरा छान मारा कही कुछ नहीं मिला…अचानक उसकी बहु की नजर चारपाई के निचे रखे बर्तन पर गयी.        
 
 
 
 
 
 
वह ख़ुशी से चीखी मिल गया पैसा और जब उसने उस बरतन के ढक्कन को हटाया तो देखा की उसमे तो पत्थर रखे थे   …..उसे एक पल के लिए विश्वास नहीं हुआ.वे वही एकदम से बैठ गए. इसी पत्थर के सिक्के कारण श्यामप्रताप का बुढ़ापा आराम से कट गया.  
 
 
 
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Infographic Source- Infographic
 
 

3- एक बार की बात है. एक किसान था. उसने ढेर सारी बकरियां पाल राखी थी. यही उसका व्यापार था. उसके घर के सामने दो कुआं था. एक कुएं में पानी था, जबकि एक कुआं सुख गया था.        

 

 

 

 

वे दोनों ही कुए थोड़ी ही दूर पर थे.  वह दिनभर बकरियों को चराता और फिर घर लौटने पर उसी कुएं से पानी निकाल कर बकरियों को पिलाता था.        

 

 

 

उनमें से एक बकरी बहुत ही नटखट थी. एक बार की  बात है सभी बकरियां चर कर आई और उसके बाद किसान से उन्हें पानी पिलाया, लेकिन उस नटखट बकरी ने पानी ना पीकर सूखे कुएं में ही छलांग लगा दी.        

 

 

 

अब कुएं में गिरते ही उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम  हो गयी. वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी. उसे लगा था कि वह आराम से इसमें से पानी पीयेगी.

 

 

 

 

अब किसान को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. उसने अपनी तरफ से बहुत प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हो सका. तब उसने गांव के अन्य लोगों को बुलाया, सभी ने तमाम कोशिशें कीं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला.        

 

 

 

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उधर बकरी गला फाड़-फाड़कर चिल्ला रही थी. उसकी इस हालत से किसान को बहुत दर्द हो रहा था. अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि इस कुएं में मिटटी डालकर बकरी को दफना दिया जाए, जिससे उसे इस पीड़ा से मुक्ति मिले. अब वही किया जाने लगा.        

 

 

 

 

अब जब बकरी ने देखा कि यई लोग उसे दफना रहे हैं तो उसके होश उड़ गए. उसने चिल्लाना बंद कर दिया और उसके ऊपर जीतनी बार मिटटी डाली जाती वह उसे झाड़कर उसके ऊपर खड़ी हो जाती .        

 

 

 

 

बकरी की चालाकी  काम आने लगी. कुछ ही देर में वह काफी ऊपर आ गयी और फिर वह कूदकर कुएं से निकल गयी…इस तरह बकरी ने अपनी चालाकी से अपनी जान बचा ली.      

 

 

 

 

 

4- राहुल, विवेक, विनोद तीनो बहुत ही गहरे मित्र थे. तीनों की दोस्ती की चर्चा पुरे गांव के साथ-साथ दूसरों गांव में होती थी. तीनों गहरे मित्र के साथ ही निठल्ले  भी थे.      

 

 

 

 

कुछ भी काम धंधा नहीं करते थे…तीनों की आदत एक बराबर थी…यूँ कह लो कि तीनों एक दुसरे से बढ़कर थे.इसीलिए इनकी खूब जमती थी.एक दिन तीनों दोस्त मेला देखने गए.

 

 

 

 

मेले से लौटने काफी रात हो गयी…लेकिन इन्हें कोई भी फर्क नहीं था…ये तीनों अपनी ही मस्ती में चले आ रहे थे. इन्हें विश्वास था कि इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, लेकिन शायद आज होनी को कुछ और ही मंजूर था.        

 

 

 

 

“तुम तीनों रुको…इतनी रात को कहाँ जा रहे हो” एक कड़क आवाज़ गूंजी.  तीनो ठिठक गए और पीछे मुड़कर देखा तो ७ लोग हथियार के साथ खड़े थे…कुछ ही देर में उन लोगों ने इन तीनों को घेर लिया.        

 

 

 

 

ये लोग तीन…वो लोग ….माहौल को देखते हुए विवीक ने डराने का अभिनय करते हुए साड़ी बात बता दी और कहा कि हमें छोड़ दो…जाने दो.  ऐसे कैसे जाने दूं..तुम लोगों के पास जो कुछ भी है तुरंत निकालो…उन ७ आदमियों से एक ने गरज कर कहा.   लेकिन हमारे पास तो कुछ नहीं है….आपको विश्वास ना हो तो आप तलासी ले सकते हो…..विनोद ने कहा.        

 

 

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चुप….एकदम चुप…मुझे पता है …..तुम भिखारियों के पास कुछ नहीं है….तुम्हे यह पैकेट गाँव के लास्ट में पीपल के पेड़ के निचे रखना है.,,,उन ७ में से एक आदमी ने कहा.      

 

 

 

 

ले..लेकिन इनमें क्या है….विनोद हकलाते हुए कहा.  सवाल नहीं…..तुम्हे सिर्फ यह पैकेट वहाँ रखना है….और हाँ कोई चालाकी नहीं….मुझे तुम लोगों के सारे काले कारनामे पता है….उनमे से एक ने कहा.      

 

 

 

 

नहीं..हम नहीं रखेंगे…..पहले बताओ इसमें क्या है…विवेक ने थोड़ी ढीठता से कहा.         ठीक है फिर…आज तुम लोग मेला गए थे न…लेकिन मेले में तुमने क्या किया उसका नमूना दिखाऊं ….. ओये दिखा तो फोटो इसे….उन ७ में से  एक ने दुसरे को कहा.      

 

 

 

 

कहते ही मोबाइल से फोटो दिखाई देने लगे….कि किस तरह ये तीनों लोगों को परेशान कर रहे थे…कुछ सामन भी चुरा रहे थे …..अब तो इन तीनों के पैरों तले जमीं खिसक गयी….मरता क्या न करता…उन्होंने हां कह दिया और पैकेट्स लेकर चल दिए.        

 

 

Story in Hindi कहानी हिंदी में 

 

 

 

आज ये तीनों बहुत ही बुरी तरह फंस गए थे….. इनका दिमाग चक्करघिन्नी हो गया था…इनकी समझ में  कुछ नहीं आ रहा था…ये तीनों चुपचाप चल रहे थे…कि इतने में पुलिस की गाडी आती दिखी….अब तो बेचारे और भी बुरी तरह फंस गए…..कुछ ही पल में पुलिस की गाडी इनके पास आकर रुकी…..ये तीनों थर-थर कापने लगे.          

 

 

 

 

कहां से आ रहे हो तुम लोग..कौन सा गांव है तुम लोग का….इतनी रात को कहा गए थे….इन पैकेट्स में क्या है…..पुलिस सिपाही की रौबदार आवाज़ में इतने सारे सवाल सुनकर तीनों की बोलती बंद हो गयी.     

 

 

 

 

  क..क..कुछ नहीं साहेब..बस थोड़ा सामान है…राहुल ने हकलाते हुए कहा.  दिखाओ…पैकेट्स दिखाओ कहकर सिपाही ने पैकेट्स उनके हाथ से छीन लिया….अब तो इनकी जान आफत में आ गयी….अब जैसे ही सिपाही ने पैकेट्स को तो सभी अवाक रह गए….उन पैकेट्स में मिटटी थी.        

 

 

 

 

अब सिपाही गुस्सा हो गया…..कहा तुम लोग पुलिस का मजाक उडाते हो.   रहने दो साहेब….इनके किये का दंड इन्हें मिल गया है….अब यह अवश्य ही सुधर जायेंगे….इन पैकेट्स को हम लोग ही दियी थे….इन लोगों की रात भर घुमने की आदत छुड़ाने के लिए.      

 

 

Kahani in Hindi Written हिंदी कहानियां 

 

 

 

इन्हें शर्म नहीं आती ये निठल्लों जैसे घुमते रहे हैं…..इन तीनों लोग राहूल, विवेक और विनोद ने जब पीछे मुड़कर देखा तो वही ७ लोग खड़े थे…लेकिन अब सभी के चेहरे सामने थे.      

 

 

 

 

उनमें से एक सरपंच और इन तीनों के पिताओं के अलावा गाँव के कुछ लोग थे….इन तीनों को अपनी गलती का एहसास हो गया….तीनों ने आगे से मेहनत करके कमाने की कसम खायी .फिर पुलिस ने भी इन्हीं हिदायत देकर छोड़ दिया…..अब ये तीनों मेहनत करके कमाने लगे…इन्हें सबक मिल गया था.        

 

 

 

 

5- जानती हो हमारे सामने किसी की हिम्मत नहीं होती है कि हमसे बात करे.  हमसे ही बड़े-बड़े राजाओं को सम्मान मिलता है. हमसे ही पुरे देश की सुरक्षा होती है.      

 

 

 

 

हम  जिसके साथ नहीं रहे वह समर में एक मिनट भी ठहर नहीं सकता है, ऐसी ही ना जाने कितनी खूबियाँ हैं मुझमें. अगर मैं अपनी पूरी खूबी गिनाने लागु तो एक छोटी सी किताब बन जायेगी….तलवार ने बड़ी ही रौबदार आवाज में अहंकार में  सुई से कहा.      

 

 

Stories in Hindi Language 

 

 

 

अब सुई बेचारी क्या करती, वह चुपचाप तलवार की धौंस सुन रही थी. इतने में डमरू ने “डम-डम” की अपनी मधुर आवाज में बोला कि तलवार कहती तो तुम ठीक हो, लेकिन तुम अपने घमंड और अहंकार में चूर हो.      

 

 

 

क्या कभी यह सोचा है कि तुम जिस राजा-महाराजा के हाथ की शोभा बढ़ाती हो, तुम्हें देखकर बड़े से बड़े दुश्मन का कलेजा काँप जाता है…विजय तुम्हारे कदमों में रहती है.        

 

 

 

 

लेकिन यहाँ तुम अपनो को ही धौंस दिखा रही हो…आपनो पर ही रौब झाड़ रही हो…..तुम्हें शर्म नहीं आती है…..यह सुनकर तलवार शर्म से झुक गयी और फिर बोली कि मैं आदत से मजबूर हूँ…मैं कभी भी जोखिम नहीं लेती…मैं किसी को भी ढील नहीं देती हूँ.      

 

 

 

 

ओ सब ठीक है लेकिन यह लड़ाई का मैदान नहीं है ना….हमें हर किसी का सम्मान करना चाहिए…सबका अपना वजूद होता है…अपना महत्व होता है..इस दुनिया में कोई भी चीज बेकार नहीं होती है…हर कोई एक दुसरे से जुड़ा हुआ है….डमरू ने कहा.        

 

 

 

 

ऐसा कुछ भी नहीं होता….जो कमजोर है वह बेकार है…तलवार ने घमंड से कहा.    वह तो समय ही बताएगा  कि कैसे तुम्हारे अहंकार का नाश  होता है…..डमरू ने मुस्कुराते हुये कहा.      

 

 

 

 

 यह सब बातें सुई के दिल पर लगी…उसने ठान लिया कि मौक़ा आने पर वह तलवार से इस अपमान का बदला अवश्य ही लेगी. उसके अहंकार का नाश  अवश्य ही होगा.      

 

 

 

 

एक दिन राजा के पांव में काँटा चुभ गया…बहुत कोशिशे की गयीं लेकिन वह नहीं निकला….राजा दर्द से छटपटा रहा था. राजा ने तुरंत ही सुई मंगवाई , लेकिन यह क्या सुई ने अपना मुंह टेढा कर लिया….जिससे काँटा नहीं निकल सका….राजा दर्द से तड़प रहा था.        

 

 

 

यह देख कर तलवार को बहुत तकलीफ हुई….लेकिन वह कुछ कर भी नहीं पा रही थी. तब राजा ने सुई से पूछा कि क्या हुआ है…ऐसी क्या बात है जो तुम गुस्सा हो गयी हो.      

 

 

 

 

तब डमरू ने साड़ी बात राजा को बता दी….फिर राजा ने तलवार को बहुत डांटा और उसे त्याग देने की धमकी दी….फिर तलवार ने हाथ जोड़कर सुई से क्षमा मांगी और कहा कि सही बात है इस संसार में कोई भी चीज बेकार नहीं है.      

 

 

 

 

उसके बाद सुई ने राजा का कांटा निकाल दिया…सुई को अपना सम्मान मिल चुका था और तलवार को भी सीख मिल गयी थी कि हर काम हर कोई नहीं कर सकता है.        

 

 

Hindi Story For Kids हिंदी की कहानी 

 

 

 

6- शीतलहर चल रही थी. मंगलवार का दिन था. मीलों चलकर एक किसान मंदिर पहुंचा तो देखा कि दरवाजा बंद था. किसान ने ऊँची आवाज लगाई ” अरे कोई है.पुजारी जी कहा हो ?”

 

 

 

 

पुजारी जी बाहर आये तो किसान को देखकर हैरान थे. वे बोले ” आज ठण्ड बहुत अधिक थी. मुझे तनिक भी भी उम्मीद नहीं थी कि आज कोई प्रार्थना के लिए आएगा. अतः मैंने कोई तैयारी नहीं की.केवल भगवान की धूप अगरबत्ती ही दिखाई.”
 
 
 
 
 

अब तुम ही बताओ केवल एक आदमी के लिए इतना सबकुछ तैयारी करना ठीक रहेगा क्या ? क्यों ना आज हम बाकी पूजा रहने दें और घर जाकर आराम करें.  

 

 

 

 

इसपर किसान बोला ” पुजारी जी ! मैं तो एक साधारण  किसान  हूँ. मैं रोज कबूतरों को दाना खिलाने आता हूँ . अगर एक भी कबूतर होता है तो भी मैं दाना जरुर खिलाता हूँ.”      

 

 

 

 

पुजारी जी यह बात सुनकर थोड़े शर्मिंदा हुए और मन ही मन भगवान से क्षमा मांगी और तैयारी में लग गए. पूरा मंदिर साफ किया. आरती की थाली सजाई. प्रसाद तैयार किये.      

 

 

 

 

अन्य पूजा के सामान तैयार करने के बाद पुरे विधि-विधान से पूजा की. इस सबमें २-३ घंटे का समायी लग गया. पूजा खत्म होने के बाद पुजारी जी ने किसान कर्त्तव्य का भान कराने के लिए धन्यवाद दिया.      

 

 

 

Moral Stories For Childrens in Hindi 

 

 

 

इसपर किसान  कुछ नहीं बोला और चुपचाप वहाँ से जाने लगा. इसपर पुजारी जी बोले ” क्या हुआ, पूजा में कोई कमी रह गयी है क्या ?”        इसपर किसान बोला ” मैं क्या बताऊँ पुजारी जी, मैं तो एक साधारण सा  किसान  हूँ. लेकिन जब मैं कबूतरों को दाना डालने आता हूँ और अगर एक ही कबूतर आता है तो मैं सारा दाना एक ही कबूतर को नहीं खिला देता हूँ. ”          

 

 

 

 

पुजारी जी को अपनी गलती का एहसास हो गया था कि सिर्फ कर्त्तव्य निभाना ही जरुरी नहीं है बल्कि परिस्थिति के हिसाब से खुद को ढालना भी आवश्यक है.        

 

 

 

 

उन्होंने सोचा कि मुझे एक आदमी के हिसाब से ही तैयारी करके पूजा शुरू कर देनी चाहिए थी, जबकि मैं तमाम लोगों के हिसाब से तैयारी करने लगा.            

 

 

 

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