सिंड्रेला की कहानी सिंडरेल्ला बहुत ही खूबसूरत और नेकदिल बच्ची थी। बचपन में ही उसकी माँ की मृत्यु हो गयी थी। वह अपने पिता और सौतेली माँ तथा अपनी सौतेली बहनों के साथ रहती थी।
सिंड्रेला की बहने उसे तनिक भी पसंद नहीं करती थीं। वह हमेशा उससे चिढ़ती थी और सिंड्रेला की सौतेली माँ हमेशा ही अपनी बेटियों का ही पक्ष लेती थी।
सिंड्रेला घर का सब काम करती और सबसे अंत में सब काम ख़त्म करने के बाद जो बचा रहता उसे खाकर सोती। इसके बाद भी उसकी सौतेली माँ और बहाने हमेशा ही उसके साथ बुरा बर्ताव करते थे।
अचानक एक दिन उसके पिता की तबियत ज्यादा खराब हुई और उनकी मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु के बाद सिंड्रेला की परेशानी बहुत बढ़ गयी। रात भर वह अपने कमरे में रोती और रोते – रोते सो जाती। उसे अपनी माँ की बहुत याद आती थी।
एक दिन पुरे राज्य के सभी नागरिकों को राजमहल के विशेष प्रांगण में आमंत्रित किया गया और खासकर राज्य की युवा लड़कियों को एक ख़ास समारोह के के लिए राज्य के महाराज ने आमंत्रित किया।
सिंड्रेला भी वहा जाने के लिए उत्साहित थी। लेकिन उसकी सौतेली माँ ने उसे जाने मना कर दिया और उसके ही हाथों अपनी लड़कियों को तैयार करवाया और शाम को उसकी सौतेली माँ और बहने राजभवन को रवाना हो गयी।
अकेली सिंड्रेला बहुत दुखी थी। वह अपनी माँ को याद कर रोने लगी। तभी वहां एक परी प्रकट हुई। उसने कहा, ” दुखी मत हो सिंड्रेला। मैं तुम्हे राजभवन भेजूंगी। मुझे तुम्हारे बारे में सब पता चल चुका है। तुम्हारी माँ ने ही मुझे भेजा है। ”
इस पर सिंड्रेला ने कहा, ” मेरे पास कोई अच्छे कपडे नहीं हैं और ना ही अच्छी सैंडल है और तो और अब काफी देर भी हो चुकी है। ”
परी मुस्कुराई और उसके बाद उसने अपनी जादुई छड़ी से सिंड्रेला के फटे – पुराने कपडे को एक बेहद ही आकर्षक ड्रेस में बदल दिया और उसकी सैंडल चमकीले शीशे की जूती में बदल गयी और उन्होंने उसके लिए एक जादुई बग्गी का बन्दोबस्त कर दिया।
सिंडरेला की कहानी हिंदी में
इससे सिंड्रेला बहुत खुश हुई और परी को धन्यवाद कहा। तब परी ने कहा, ” सिंड्रेला यह जादू रात १२ बजे तक ही काम करेगा। तुम्हे उसके पहले ही घर वापस लौटना होगा। ”
सिंड्रेला ने हाँ कहा और राजभवन की तरफ चल दी। राजभवन बेहद आकर्षक लाइट्स से सजाया गया था। वहाँ तरह – तरह के पकवान भी थे। सभी लोग खूब मस्ती कर रहे थे।
जब सिंड्रेला वहाँ पहुंची तो हर कोई बस उसे ही देखता रह गया। वह बेहद ही खूबसूरत लग रही थी। वह पहचान में ही नहीं आ रही थी। यहां तक कि उसकी सैटेली माँ और बहनें भी उसे पहचान नहीं सकीं।
राजकुमार ने जैसे ही सिंड्रेला को देखा उसका दीवाना हो गया। वह पूरी पार्टी में सिर्फ सिंड्रेला के साथ ही डांस करता रहा। सिंड्रेला बहुत प्रसन्न थी। अचानक उसे परी की बात याद आ गयी। उसनेसमय देखा बारह बजने ही वाले थे।
वह तेजी से वहाँ से निकली। उसके पीछे राजकुमार भी तेजी से भागा। उसी जल्दबाज़ी में सिंड्रेला की शीशे की एक जूती उसके पैरों से निकल गयी । सिंड्रेला के पास उसे उठाने का समय नहीं था। वह तेजी से भागी और वहा से अपने घर चली आयी।
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राजकुमार ने वह जूती रख लिया। उसने अपने पिताजी से सारी बात बताई और कहा, ” जिस भी लड़की का पैर यह जूती में आएगी मैं उसी से शादी करूंगा। ”
राजा ने पुरे राज्य में सैनिकों और मंत्री को उस जूते के साथ भिजवाया और आदेश दिया क, ” जिस भी लड़की के पैर में यह जूती आये उसे पूरे सम्मान के साथ राजमहल में लाया जाए। ”
अब राजा के मंत्री और सैनिक घर – घर जाकर सभी युवा लड़कियों को वही जूती पहनाकर देखने लगे लेकिन वह किसी के भी पैर में नहीं बैठती थी।
अंत में वे सिंड्रेला के घर आये। क्योंकि उसका घर सबसे अंत में था। वहाँ उसकी बहनो ने उस जूती को बहुत ही पहनने की कोशिश की लेकिन वह उनके पैरों में ठीक से नहीं बैठी।
इस बीच सिंड्रेला की माँ ने उसे एक कमरे में बंद कर दिया था। सिंड्रेला दुखी होकर रोने लगी। तभी परी फिर से प्रकट हुई और बोली, ” बेटी तुम्हारे बुरे दिन अब ख़त्म हो चुके हैं। तुम रोओ मत बल्कि एक सुन्दर गीत गाओ। ”
सिंड्रेला परी की बात को मानकर गीत गाने लगी। उसकी मधुर आवाज़ जैसे ही मंत्री के कानो तक पहुंची वह मंत्रमुग्ध हो गया। उसने सिंड्रेला की सौतेली माँ से पूछा, ” किया घर में और कोई लड़की है ? ”
इस पर सिंड्रेला की माँ ने तमाम बहाने बनाने शुरू कर दिए। इससे मंत्री क्रोधित हो गया और सैनिको को घर की तलाशी लेने का आदेश जारी कर दिया।
सैनिक सिंड्रेला को ढूंढ लाये और उसे पूरे सम्मान के साथ राजमहल लाया गया। वहाँ राजकुमार ने सिंड्रेला से कहा, ” सिंड्रेला मैं तो तुम्हारा नाम भी नहीं जानता था। बस तुम्हे देखते ही तुमसे प्यार हो गया। . क्या तुम मेरे साथ शादी करोगी ? ”
सिंड्रेला भी उसे प्यार करने लगी थी। उसने हाँ कह दिया और उसके बाद दोनों की शादी हो गयई। दोनों ख़ुशी से रहने लगे। मित्रों यह कहानी सिंड्रेला की कहानी आपको कैसी लगी जरूर बताएं और इस तरह की दूसरी कहानी के लिए इस ब्लॉग को सब्स्क्राइब जरूर करें और दूसरी कहानी नीचे पढ़ें।
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