दो जलपरी की कहानी हिंदी में
दो जलपरी की कहानी यह दो जलपरियों की कहानी है। एक बड़ी नदी में दो जल परियां रहती थी। एक का नाम कमला था और दूसरी का नाम विमला था। कमला एक नरम दिल की जलपरी थी तो वहीँ विमला थोड़ी कड़क स्वभाव की।
सब कुछ अच्छे से चल रहा था और सभी मछलियां उसमें बहुत ही खुशी से रहती थी। बारिश का मौसम आया और एक दिन तेज बाढ़ आई और उस बाढ़ में दूसरी नदी से केकड़ा तथा अन्य जलीय जीव उस नदी में आ पहुंचे।
जलीय जीव मछलियों को मारकर खाने लगे। इससे मछलियों में आतंक छा गया। मछलियों ने आपस में विचार किया कि अगर हम इन जलीय जीव का सामना नहीं करेंगे तो फिर यह हमें मार कर खा जाएंगे।
एक मछली ने कहा, ” हमें इनका सामना करने के लिए एक नेतृत्व की आवश्यकता होगी तो फिर क्यों ना हम अपनी रानी चुने। ” इस बात का सभी मछलियों ने स्वागत और समर्थन किया।
उसके बाद सभी मछलियां दोनों जल परियों के पास पहुंची और उन्हें अपने फैसले से अवगत कराया। यह सुनकर विमला ने कहा, “मछलियों की रानी मैं ही बनूंगी क्योंकि मेरा स्वभाव कड़क है और मैं बाहर से आए सभी जलीय जीव को मार कर भगा दूंगी और मछलियों को खाना भी दूंगी। ”
यह सुनकर कमला ने कहा, “नहीं मुझे इस नदी की रानी बनना चाहिए क्योंकि मेरा स्वभाव नरम है और मैं फैसला सोच समझ कर लेती हूं। ” लेकिन सभी विमला के पक्ष में थी क्योंकि जलीय जीव को भगाने के लिए एक कड़क स्वभाव की जलपरी चाहिए थी और उस पर विमला ने उन्हें फ्री में खाना खिलाने की बात भी कह दी थी।
सभी मछलियों ने विमला को रानी चुन लिया। उसके बाद विमला ने एक-एक करके सभी बाहरी जलीय जीव को भगा दिया और इससे मछलियों में पर्याप्त मात्रा में भोजन हो गया।
अतः उन्हें फ्री का भोजन की आवश्यकता ही नहीं रह गई और सभी खुशी से रहने लगे कि अचानक एक दिन एक केकड़ा विमला से मिलने आया और उसने अपनी चापलूसी भरी बातों से विमला को फंसा लिया।
Pari Story in Hindi
उसने कहा, ” आप तो इस नदी की रानी है। आपका सभी प्रजा पर पूरा हक है तो फिर आप हमें इस नदी से क्यों भगा रहीं हैं क्या हम आपकी प्रजा नहीं हैं ? अगर आप हमें नदी में रहने दे तो फिर हम आपको बहुत अच्छा अच्छा भोजन कराएंगे। आपको किसी प्रकार का कुछ भी काम करने की आवश्यकता नहीं होगी। हम आपके लिए सब काम करेंगे। ”
विमला लालच में आ गई और उसने कहा, ” ठीक है। लेकिन तुम नदी में आतंक नहीं मचाओगे और मछलियों को नहीं मारोगे।” तब उस केकड़े ने कहा, ” अगर हम मछलियों को महीन मारेंगे तो हम अपना भोजन कैसे करेंगे? कृपया आप ही इसका समाधान बताएं। ”
जलपरी ने कहा, ” ठीक है। तुम लोग अपनी आवश्यकतानुसार मछलियों को मारो लेकिन उन्हें तंग मत करो और ज्यादा की संख्या में उन्हें मत मारो। ”
इस पर केकड़े ने जलपरी का धन्यवाद किया और वहां से चला गया। यह सब बातें कमला नामक जलपरी सुन रही थी। उसने यह सब बातें अन्य मछलियों को बताई।
सभी मछलियों में कोलाहल मच गया। उन्हें अपने फैसले पर अफसोस हो रहा था लेकिन अब क्या किया जा सकता था। नदी की मछलियां एकजुट होकर विमला के पास गयीं और उससे पूछा कि आपने ऐसा क्यों कहा ? अब हम कहाँ जाएँ ?
इस पर विमला ने कहा, ” मैं इस नदी की रानी हूं इसलिए मैंने जो फैसला लिया है वह सोच समझ कर लिया है। ” सभी मछलियां निराश होकर वहां से चली गई।
केकड़े तथा दुसरे जलीय जीव – जंतु धीरे-धीरे करके मछलियों को खाने लगे। एक दिन की बात है विमला जलपरी एक मछुआरे के जाल में फंस गई और वहा से बचाओ बचाओ करके चिल्लाने लगी।
दो जलपरी की कहानी हिंदी
सभी मछलियां खुश थी। एक मछली ने कहा, ” चलो अच्छा हुआ आज तुम्हें फल मिल रहा है। अब तक तुमने बहुत सारी मछलियों की हत्या करवाई है। आज तुम्हें भगवान ने उसका फल दिया है। ”
तभी अचानक से वहाँ पर कमला जलपरी आ पहुंची और विमला को बचाने लगी। तब मछलियां बोली आप इसे क्यों बचा रही है ? इसने बहुत सारी मछलियों की हत्या करवाई है।
तब कमला ने कहा अगर हम इसे नहीं बचाएंगे तो हमारे और इस में फर्क क्या रह जाएगा और उसके बाद कमला ने विमला को बचा लिया। उसके बाद विमला ने सभी मछलियों से माफी मांगी और उसके बाद कमला और विमला दोनों जलपरियों ने मिलकर केकड़ों और अन्य दुसरे जलीय खतरनाक जलीय जीव – जंतु को उस नदी से भगा दिया। उसके बाद दोनों जलपरियाँ और मछलियाँ ख़ुशी से रहने लगी।
२- एक राज्य में राजा रानी रहते थे। रानी बहुत ही खूब सूरत थी। रानी की एक बेटी थी जिसका नाम एंजेल था। अचानक से रानी की अक्सर तबीयत खराब रहने लगी।
उन्होंने एक दिन राजा को बुलाया और उनसे आग्रह किया कि वे दूसरी शादी कर ले। लेकिन राजा रानी को बहुत प्यार करते थे। उन्होंने रानी की इस बात को तुरंत ही मना कर दिया।
कुछ ही दिन में रानी की मृत्यु हो गई। राजा इससे बहुत ही दुखी हुए। एक दिन उनके एक मंत्री ने आकर राजा से कहा कि महाराज आपको शादी कर लेनी चाहिएक्योंकि जो कि राज्य कि महिलाएं अपना भी प्रतिनिधित्व चाहती हैं।
तब राजा ने कहा, ” ठीक है, लेकिन मेरी एक शर्त है। मेरे लिए मृत रानी के जैसी ही राजकुमारी ढूंढी जाए। ” अब मंत्री तथा राज्य के अन्य सिपहसालार इस कार्य में जुट गए। परन्तु उन्हें कोई सफलता नहीं मिल रही थी।
एक दिन राजा के एक पुराने मित्र उनसे मिलने आये। वे बगल के देश के राजा थे। उनका नाम अर्नाल्ड था। राजा ने अपने मित्र अर्नाल्ड की खूब आव – भगत की और अपनी पुत्री ऐंजल से मिलवाया।
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ऐंजल के चले जाने के बाद अर्नाल्ड ने राजा से कहा, ” मित्र एक बात कहुँ। क्यों ना अब इस दोस्ती को रिश्ते में बदल दिया जाए। ” ” कैसे ? ” राजा ने खुश होकर कहा।
राजा का भाव समझ कर अर्नाल्ड ने कहा, ” आपकी पुत्री बिलकुल अपनी माँ पर गयी है। अतः उसकी शादी मेरे पुत्र हो जाए और आप एंजल को इस राज्य का कार्यभार सौप दें। इससे आपको दोनों परेशानी समाप्त हो जायेगी। ”
राजा को यह सुझाव बहुत ही पसंद आया। उन्होंने यह बात अपनी पुत्री को बतायी। लेकिन उसने विवाह से मना कर दिया और कहा, ” मैं ऐसे किसी के साथ विवाह कैसे कर सकती हूँ जिसे मैं जानती तक नहीं। ”
तब राजा ने उसे बहुत समझाया। इसपर राजकुमारी एंजल ने कहा, ” मेरी अगर दो शर्ते पूरी कर दी जाएंगी तो मैं विवाह कर लूंगी। पहली शर्त कि मुझे सूर्य की तरह तेज और चमकीला वस्त्र बना कर दिया जाए और दूसरा तारों की तरह चमकीला। ”
राजकुमारी को पूरी उम्मीद थी कि यह नामुमकिन है। ऐसा वस्त्र बन ही नहीं सकता। लेकिन राज्य के कारीगरों ने ठीक वैसा वस्त्र बना दिया। अब राजकुमारी के पास कोई रास्ता नहीं था।
राजकुमारी की शर्त पूरी हो चुकी थी। अब शर्त के अनुसार उन्हें शादी करनी थी। राजकुमारी ने काफी देर तक इसपर विचार किया और उसके बाद उन्होंने महल से भागने का निर्णय लिया।
राजकुमारी ने बाहर सैर करने का बहाना बनाया और वहां से भाग निकली। चलते = चलते वह एक घने जंगल में पहुंच गई और रास्ता भटक गई।
काफी रात हो चुकी थी और घोड़ा भी थक चुका था। राजकुमारी ने तभी पेड़ की एक खोल देखी और उसी में रात बिताने का निर्णय लिया। राजकुमारी काफी थक चुकी थी और इसलिए वह सुबह देर तक सोती रही।
सुबह उस क्षेत्र का राजा जंगल में घूमने के लिए आया। जब उसने राजकुमारी को देखा तो उसने अपने मंत्री से कहा देखो वह लड़की कौन है ?वह इस समय यहां क्यों सोई हुई है?
मंत्री ने राजकुमारी को जगाया और उनसे यहां सोने का कारण पूछा। राजकुमारी को लगा यह उनके ही राज्य का कोई गुप्तचर है इसलिए उन्होंने बहाना बना दिया और उन्होंने कहा, ” वह एक गरीब है। उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है। ”
यह बात मंत्री ने राजा को बताई। तब राजा ने उन्हें कहा कि इन्हे राज्य में लेकर चलिए और राजमहल की रसोई में राख निकालने का काम दे दीजिए।
जब राजकुमारी ने उस युवा राजा को देखा तो उस पर मोहित हो गई और उन्हें यह आभास हो गया कि वह दूसरे राज्य में हैं लेकिन वह कुछ बोल ना सकीय।
राजकुमारी राजमहल की रसोई में राख निकालने का काम करने लगी। एक दिन की बात है। राजमहल में फंक्शन आयोजन किया गया। उसमें राज्य के तमाम लोग आए।
उसमें बहुत सारी लड़कियां और महिलाएं भी थीं। राजकुमारी ने रसोईये से कहा कि वह आधे घंटे के लिए इस फंक्शन में जाना चाहती है। इसपर रसोइए ने कहा नहीं अभी बहुत सारा काम है और राख भी निकालनी है।
तब राजकुमारी ने कहा कि मैं आधे घंटे के अंदर वापस आ जाउंगी और अपना काम पूरा करुँगी। रसोइया बहुत ही अच्छा था और उसने उन्हें जाने दिया।
राजकुमारी ने अपना पहला वाला ड्रेस पहना जो सूर्य की तरह चमकदार था। राजकुमारी बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। जब वह राजमहल पहुंची तो हर कोई बस उन्हें ही देखता रह गया।
राजा राजकुमारी पर मोहित हो गया और उसके साथ नृत्य करने लगा। आधा घंटा हुआ राजकुमारी तेजी से वहाँ से निकल गयी और जल्दी – जल्दी अपने कपड़े बदल कर रसोई घर में आ गई।
राजकुमार आश्चर्यचकित था। वह सोच रहा था कि यह राजकुमारी कौन थी और कहां से आई थी ?समारोह के बाद राजकुमार ने रसोईये से सूप मंगवाया।
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रसोईया दूसरे काम में व्यस्त था। उसने ऐंजल से कहा कि वह जल्दी से ही राजा के लिए सूप बना दे। राजकुमारी ने सूप बनाया। उसके बाद रसोईया वह सूप राजा के पास ले गया।
राजा को वह सूप बहुत पसंद आया। राजा ने पूछा आज का सूप किसने बनाया था ? आपके द्वारा बनाए जाने वाले सूप से यह बिल्कुल अलग था और बहुत ही स्वादिष्ट था।
तब रसोईये ने कहा, ” महाराज यह सूप नौकरानी ने बनाया था जो राख निकालती है। ” तब राजा ने उसे बुलाने का आदेश दिया। वह उसे उपहार देना चाहता था।
राजकुमारी ने सोचा, ” ऐसे में राजा मुझे पहचान सकता है “इसलिए उसने अपने चेहरे पर थोड़ी राख लगा ली। जब वह राजा के पास पहुंची तो राजा को शक हुआ कि यह तो वही राजकुमारी है जो राजमहल में आई थी।
राजा ने उससे पूछा क्या वह राजमहल में आई थी ? तब राजकुमारी ने कहा, ” जी नहीं महाराज ! मैं राजमहल में नहीं आई थी।” राजा ने उसे उपहार दिया और राजकुमारी वहां से चली गयी।
लेकिन राजा को यह शक हो चुका था कि यह वही राजकुमारी है जो महल में आई थी। उन्होंने फिर से उसी तरह का आयोजन किया। राजकुमारी राजा पर मोहित हो चुकी थी पर अपना भेद बताना नहीं चाहती थी।
उन्होंने फिर से रसोईये से कहा कि आधे घंटे नृत्य देखने जाना चाहती है। रसोइये ने कहा ठीक है लेकिन आधे घंटे बाद आप वापस आ जाना। इस बार राजकुमारी ने तारों की तरह चमकने वाला कपड़ा पहना।
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जब राजकुमारी वहाँ पहुंची तो पहले की तरह सब लोग उसे बस देखते ही रह गए। राजा राजकुमारी के साथ नृत्य करने लगा और चुपके से उसकी उंगली में एक अंगूठी डाल दी।
राजकुमारी को इसके बारे में कुछ नहीं पता चला और जैसे ही आधा घंटा हुआ राजकुमारी वहां से चली गई और उसके तुरंत बाद राजा ने रसोइये से सूप मंगवाया और कहा कि सूप नौकरानी ही लेकर आये।
कुछ देर में राजकुमारी सूप लेकर आई। राजा ने राजकुमारी से पूछा, ” क्या आप राजमहल गई थी ? ” तब राजकुमारी ने फिर कहा नहीं वह राजमहल नहीं गई थी।
तब राजा ने कहा, ” तुम झूठ बोलती हो। तुम राजमहल गई थी। इसका सबूत तुम्हारे उंगलियों में पड़ी यह अंगूठी है जो नृत्य के समय मैंने तुम्हें पहना दी थी। ”
राजकुमारी हैरान रह गई। तब उसने कहा, ” महाराज मैं राजमहल में गई थी और मैं आपसे इसलिए झूठ बोल रही थी क्योंकि मैं देखना चाहती थी क्या आप मेरे खूबसूरती पर फ़िदा हैं या फिर आप मुझसे सच में प्रेम करते हैं। ”
तब राजा ने कहा मैं आपसे सचमुच प्रेम करता हूं। राजकुमारी बहुत ही खुशी हुई और राजकुमारी का विवाह हो गया। राजकुमारी की पिता भी इससे बहुत खुश हुए और उसे अपने राज्य का शासक बना दिया।
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