सोई हुई राजकुमारी की कहानी
सोई हुई राजकुमारी की कहानी बहुत समय पहले की बात है। एक राज्य में राजा और रानी रहते थे। वह बहुत ही खुशहाल राज्य था। वहाँ प्रजा बहुत ही खुशहाल थी।
लेकिन उन्हें कोई संतान नहीं थी और इस वजह वे दोनो बहुत ही दु:खी थे। एक दिन रानी राजमहल के सरोवर के किनारे सूर्य-देवता से संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना कर रही थी। तभी वहाँ से इक साधू गुजरे।
उन्होंने कहा, ” मैं भगवान सूर्यदेव की आगया से यहाँ आया हूँ। मैं तुम्हे आशीर्वाद देता हूँ कि एक वर्ष के भीतर आप एक सुंदर बच्ची को जन्म देगी। साधू की बात सच हुई।
एक वर्ष के भीतर रानी ने एक बच्ची को जन्म दिया। वह बच्ची बहुत ही सुंदर थी। उसके मुख पर सूर्य की किरणों के समान चमक थी। राजा-रानी छोटी सी राजकुमारी को देखकर ख़ुशी से झूम उठे. उन्होंने उसका नाम किरण रखा।
किरण के जन्म की ख़ुशी में राजमहल में एक बड़े भोज का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य की संपूर्ण प्रजा आमंत्रित थी। इसके साथ ही परीलोक से परियों को भी उसमें आमंत्रित किया गया था। वहाँ से कुल १३ परियों को आमंत्रित किया जाना था, लेकिन भूलवश राजा केवल १२ परियों को ही आमंत्रित किये।
Soi Hui Rajkumari Ki Kahani
राजभोज बहुत धूमधाम से संपन्न हुआ। राजभोज में आये लोगों ने किरण को ढेरों उपहार और आशीर्वाद दिए। जब परियों की बारी आई, तो उन्होंने जादू से न सिर्फ किरण को अनमोल उपहार दिए, बल्कि कई जादुई आशीर्वाद भी दिए।
यह सिलसिला ग्यारहवी परी तक चलता रहा। अंत में जब बारहवीं परी की बारी आई, तो उसके आशीर्वाद देने के पहले ही तेरहवी परी वहाँ आ गई।
तेरहवी परी राजा-रानी द्वारा उसे राजभोज में आमंत्रित न किये जाने के कारण बहुत क्रोधित थी। अपने इस अपमान का बदला लेने के लिए उसने किरण को श्राप दे दिया कि “ अपने सोलहवे जन्मदिन पर किरण की उंगली में एक सुई चुभेगी और वो मर जाएगी। ” इसके बाद वह क्रोधित होकर वहां से चली गयी।
इस श्राप को सुनकर राजा-रानी बहुत दु;खी हो गए। दोनों ने परियों से इसे समाप्त करने का निवेदन किया। लेकिन परियों नने इसे पूर्ण रूप से ख़त्म करने में असमर्थता जाहिर की। ये सुनकर वे और ज्यादा दु:खी हो गये।
तब बारहवी परी सामने आई। उसका आशीर्वाद अभी शेष था। उसने राजा से कहा, “ये सत्य है कि तेरहवी परी के श्राप को मैं समाप्त नहीं कर सकती, लेकिन अपने आशीर्वाद से उसे कम अवश्य कर सकती हूँ। ”
उसके बाद उसने किरण को आशीर्वाद दिया कि सोलहवे जन्मदिन पर वह सुई चुभने से मरेगी नहीं, बल्कि सौ वर्षों के लिए एक गहरी नींद में सो जाएगी।
राजा ने बारहवी परी को धन्यवाद दिया, लेकिन रानी अभी भी उदास थी। उसने परी से कहा, “मेरी इच्छा है कि मैं किरण का विवाह किसी सुन्दर और वीर राजकुमार के साथ होते हुए देखूं , लेकिन ये संभव नहीं क्योंकि जब सौ वर्षों के बाद किरण अपनी नींद से जागेगी, हम लोग जीवित नहीं रहेंगे। ”
रानी की बात सुनकर बारहवी परी ने कहा, “ किरण के सोने के कुछ देर बाद राजा-रानी सहित राज्य की सारी प्रजा और पशु-पक्षी भी सो जायेंगे। वे तब तक सोते रहेंगे जब तक किरण सोती रहेगी। किरण की नींद तभी खुलेगी जब एक सुंदर सच्चा प्यार करने वाला राजकुमार उसके हाथ को चूमेगा। ” इसके बाद सभी परियां वहाँ से चली गई।
चमकती हुई राजकुमारी की कहानी
बारहवी परी के आशीर्वाद से राजा-रानी को कुछ राहत अवश्य मिली। लेकिन अब भी वे किरण के भविष्य को लेकर चिंतित थे। उन्होंने सैनिको से कहकर राज्य के सारे चरखे और सुईयां नष्ट करवा दिए, ताकि किरण उस दुष्ट परी के श्राप के प्रभाव से बच सके।
धीरे-धीरे समय बीतने लगा और किरण बड़ी होने लगी। वह सुन्दर, दयालु और बुद्धिमान थी. ठीक वैसे ही, जैसे परियों ने आशीर्वाद दिया था। राज्य के सभी लोग उसे बहुत पसंद करते थे।
धीरे – धीरे किरण का सोलहवां जन्मदिन आ गया। राजा ने एक बड़े भोज का आयोजन किया और किरण को हमेशा अपने ही साथ रखे।
शाम तक कोई अनहोनी नहीं हुई। तभी अचानक से इक तूफ़ान आया। भयंकर तूफ़ान। सब लोग इधर – उधर भागने लगे। इसी बीच किरण भागते – भागते एक पुरानी ऊँची मीनार में घुस गई।
उस मीनार में गोलाकार सीढ़ियाँ बनी हुई थी। किरण सीढ़ियाँ चढ़ने लगी। चढ़ते-चढ़ते वह मीनार के सबसे ऊपरी हिस्से पर पहुँच गई। वहाँ एक छोटा सा कमरा बना हुआ था। उस कमरे में प्रवेश करने पर उसने देखा कि वहाँ एक बूढ़ी औरत चरखा चला रही है। किरण ने अपने जीवन में कभी चरखा नहीं देखा था। उसने जिज्ञासावश बूढ़ी औरत से पूछा, “ये तुम क्या कर रही हो?”
“मैं चरखे पर सूत कात रही हूँ। ” बूढ़ी औरत ने उत्तर दिया। वह बूढ़ी औरत कोई और नहीं, बल्कि वही दुष्ट परी थी जिसने किरण को श्राप दिया था। उसने किरण को चरखा चलाने के लिए उकसाया। किरण ने भी उत्सुकतावश उसकी बात मान ली। लेकिन जैसे ही उसने चरखा चलाया, एक नुकीली सुई उसकी उंगली में आ घुसी। वह वहीँ गिर पड़ी और गहरी नींद में सो गई।
उसके सोते ही राज्य के सभी लोग एक – एक करके सो गए। राजा-रानी, दरबारी, सैनिक, राज्य की सम्पूर्ण प्रजा और पशु-पक्षी जहाँ थे, वहीँ सो गए। उनके सोने के कुछ बाद घनघोर काले बादल राज्य के ऊपर छा गए और पूरा राज्य अँधेरे में डूब गया। राज्य के चारों ओर घनी कंटीली जंगली झाड़ियाँ उग आई और वह राज्य उन झाड़ियों के पीछे छुप गया।
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समय बीतता चला गया और कंटीली झाड़ियों के पीछे छुपा राज्य अतीत का हिस्सा बन गया। लेकिन उस सोये हुए राज्य और सुंदर राजकुमारी किरण की कहानियां दूर-दूर के प्रदेशों में प्रसिद्ध थी। कई राजकुमार किरण को पाने की आशा में उस सोये हुए राज्य को ढूँढने जाते लेकिन उन कंटीली मजबूत झाड़ियों को पार करने में सफल नहीं हो पाते। अपने इसी प्रयास में कई राजकुमार कंटीली झाड़ियों में फंसकर मर गए। धीरे-धीरे राजकुमारों ने मौत के डर से वहाँ जाना छोड़ दिया।
कुछ वर्षों बाद एक दिन प्रकाश नाम के राजकुमार ने जब सोती हुई राजकुमारी की कहानी सुनी, तो वह मन ही मन उससे प्रेम कर बैठा। उसने उस राज्य का पता लगाने का निश्चय किया। वह किरण को नींद से जगाना चाहता था और उस राज्य की खुशहाली फिर से वापस लाना चाहता था।
जब राजकुमार प्रकाश के पिता को यह पता चला, तो उन्होंने वहाँ जाने के खतरे को देखते हुए उसे रोकने का प्रयास किया। लेकिन प्रकाश नहीं माना और उस राज्य को खोजने के लिए निकल पड़ा।
कई दिनों की यात्रा के बाद वह उस राज्य के सामने पहुँचा। उस दिन किरण को सोये हुए सौ वर्ष पूर्ण हो चुके थे। राजकुमार ने राज्य के चारों ओर कंटीली झाड़ियों का जाल देखा, लेकिन वह बहादुर था। उसने अपनी ताकत से झाड़ियों को काट दिया।
छोटी राजकुमारी / Sapano Ki Kahaniyan
वह राज्य के अंदर पहुँचा। वहाँ उसने देखा कि जो जहाँ है, वहीँ सोया पड़ा हुआ है। राजमहल के द्वार पर उसने दरबानों को भी सोते हुए पाया। महल के अंदर राजदरबार में पहुँचने पर उसने राजा-रानी और दरबारियों को भी सोते हुए पाया। उसके बाद वह उस मीनार में पहुंचा जहां किरण सोयी हुई थी।
जब राजकुमार प्रकाश ने किरण को देखा, तो बस देखता ही रह गया। उसके मन में किरण के बारे में सुनकर जो प्रेम का बीज फूटा था, वह और गहरा हो गया। उसने किरण के पास जाकर उसका हाथ अपने हाथों में लिया और उसे चूम लिया।
उसके ऐसा करते ही दुष्ट परी का श्राप टूट गया और किरण नींद से बाहर आ गई। उसने अपनी ऑंखें खोली, तो एक सुंदर राजकुमार को अपने सामने पाया। वह समझ गई कि ये वही सच्चा प्रेम करने वाला राजकुमार है। राजकुमार प्रकाश किरण के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे उसने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
दोनो कमरे से बाहर निकलकर राजदरबार पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि राजा-रानी और सभी दरबारी नींद से जाग चुके थे। उन्होंने किरण और राजकुमार प्रकाश का स्वागत किया। राजा-रानी बहुत प्रसन्न थे। उन्होंने दो दिन के बाद किरण और राजकुमार प्रकाश के विवाह की घोषणा कर दी।
सोई हुई राजकुमारी की कहानी हिंदी में
दूसरे दिन रानी और किरण महल के सरोवर के किनारे सूर्य देवता को धन्यवाद दे रहे थे। तभी अचानक सूर्य से एक आग का गोला निकला और परीलोक में दुष्ट परी के ऊपर जा गिरा और दुष्ट परी उसमें जलकर मर गयी। उसकी बाद सभी ख़ुशी से रहने लगे
2- एक नगर में मंदिर के पास एक भिखारी रहता था। वह वहाँ पर एक कटोरा लेकर बैठ जाता और जो भी कोई उसमें कुछ डालता उसी से वह गुजारा चला लेता था। वह कभी भी अन्य भिखारियों की तरह किसी से कुछ नहीं मांगता था।
कई वर्षों से यही चला आ रहा था। उसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी कि वह कहाँ से आता है और कहाँ जाता है।
एक दिन एक बड़ा सेठ उस मंदिर में दर्शन को आया। वह बहुत ही अमीर था। बड़ी सी गाडी से वह उतरा। भिखारी उसकी तरफ ललचाई नज़रों से देख रहे थे।
अमीर आदमी मंदिर में दर्शन करके आया तो भिखारी उससे पैसे माँगने लगे। वह भिखारियों के पास पैसे फेकते हुए जाने लगा।
जब वह इस भिखारी के पास आया तो उसने भी अपना कटोरा आगे कर दिया। लेकिन अमीर आदमी पैसे के रौब में पैसे को कटोरे में ना डालकर जमीन पर फेंक दिया और आगे बढ़ निकला।
भिखारी यह देखते ही वह पैसा उस अमीर आदमी की तरफ फेकते हुए बोला, ” यह लो अपनी दौलत। तुम जैसे गरीब का पैसा मुझे नहीं चाहिए। ”
तब वह आदमी वहीँ रुक गया और उसे एक महात्मा की कही हुई बात याद आ गयी कि, ” जिस दान के साथ दानदाता खुद को समर्पित नहीं कर देता वह दान व्यर्थ है। ”
अमीर आदमी को बड़ी ही शर्मिंदगी हुई। उसने वह पैसा उठाया और बहुत ही इज्ज़त से उसे भिखारी के कटोरे में डाल दिया और उसे धन्यवाद कहकर चला गया।
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