Hindi Kahaniya Written मित्रों यह Hindi Story Written है। इसमें प्रेम कहानी है। मित्रों हर किसी की प्रेम कहानी पूरी नहीं होती है। बहुतों की अधूरी रह जाती है। आज ऐसे ही एक Hamari Adhuri Kahani के बारे में बताने जा रहा हूँ।
कुछ दिन पहले की बात है, काम के सिलसिले में मैं दिल्ली आया हुआ था। मैं पहली दफा वहां गया था। ना कोई दोस्त, ना किसी से जान पहचान और ना कहीं रहने का ठिकाना। सब कुछ मेरे लिए नया नया था। अनजान शहर में मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था। पर मुझे खुद पर पूरा भरोसा था कि मैं किसी ना किसी तरह खुद को संभाल ही लूंगा।
सबसे पहले रहने के लिए मुझे एक कमरे की तलाश थी। काफी देर भटकने के बाद आखिरकार मुझे एक अच्छा कमरा मिल ही गया। छोटा ही सही परंतु रहने लायक था। रहने के साथ-साथ वहीं पर ही मेरे खाने का भी इंतजाम हो गया था। अब मुझे किसी बात की चिंता नहीं थी। अगले ही दिन मुझे दफ्तर जाना था। हमेशा कि तरह सुबह-सुबह तैयार होकर मैं अपने दफ्तर के लिए रवाना हो गया। सब कुछ अच्छा चल रहा था।
उस दिन रविवार था, मेरे दफ्तर की छुट्टी थी। मैं अपने घर पर ही आराम कर रहा था। सारा दिन आराम करते-करते ऊब गया था। सोचा कि छत पर थोड़ी खुली हवा में टहल लूं। मैं छत पर टहल ही रहा था कि मेरी नजर एक लड़की पर पड़ी। वह मुझे देख रही थी। देखने में काफी खूबसूरत और उम्र लगभग मेरे जितने ही। मैं थोड़ा संदेह में पड़ गया और सोचने लगा कि वह मुझे क्यों देख रही है? कुछ समय बाद मैं वहां से चला गया और उसे अनदेखा कर दिया।
अगले दिन दफ्तर जाते वक्त वही लड़की मुझे रास्ते में दिखाई दी। ना जाने क्यों, वह मुझे बड़े ही प्यार से देख रही थी। मैंने फिर से उसे अनदेखा कर दिया और वहां से चला गया।
दिन यूं ही गुजरते गए और फिर से रविवार आ गया। उस दिन भी शाम का वक्त था। मैं अपनी छत पर था। वह मेरे सामने वाले घर में रहती थी। वह भी छत पर थी। मेरी और उसकी नगर टकराने लगी।
वह मुझे बड़े ही मासूमियत के साथ देख रही थी। शायद वह मुझे पसंद करती थी। वह मुझसे कुछ कहना चाहती थी। पर हमेशा की तरह मैंने उसे नजरअंदाज कर दिया। कुछ दिनों तक सिलसिला यूं ही चलता रहा। ना जाने क्यों मैं हर बार उसे अनदेखा कर दिया करता था।
एक दिन दफ्तर जाते वक्त उसका और मेरा आमना-सामना हुआ। मैं उससे पूछना चाहता था, आखिर क्यों वह मुझे देखा करती है? क्या वह मुझसे कुछ कहना चाहती है? परंतु इस बार उसने मुझे अनदेखा कर दिया।
ना जाने क्यों मुझे थोड़ा बुरा लगा, पर मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।समय बीतता गया और फिर से रविवार आ गया। हमेशा की तरह मैं और वह छत पर थे। परंतु अब वह मुझे नहीं देख रही थी।
वह अपने फोन में व्यस्त थी और मुझे नजरअंदाज कर रही थी। मैं थोड़ा हैरान व परेशान हो गया और सोचने लगा कि जो लड़की कल तक मुझे देखती थी तथा शायद पसंद करती थी, वह आज मुझे क्यों अनदेखा कर रही है? गलती शायद मेरी ही थी। काफी समय बीत गया था, उसने मुझे एक दफा भी नहीं देखा। शायद वह मुझे पसंद आने लगी थी।
दिन यूं ही बीतते गए। कई बार हमारा आमना-सामना भी हुआ परंतु हर बार वह मुझे नजरअंदाज कर रही थी। मैं उससे बात करना चाहता था, पर हिम्मत ही नहीं जुटा पाया। कुछ दिन तक मैं भी उसे देखता रहा, कि शायद हमारी नजर मिल जाए और मैं उससे कह सकूं कि “मैं तुम्हें पसंद करता हूं।” परंतु ऐसा नहीं हुआ। जरूर वह मुझसे खफा हो गई थी। शायद जाने अनजाने में मैंने उसका दिल दुखाया होगा।
दिन गुजरते गए और हमारी कहानी वहीं थम गई। आज ना वह मुझे देखती है और ना मैं उसे। पर कभी कबार हमारी नजर मिल जाती है और यही अफसोस होता है कि एक दूसरे को पसंद करते हुए भी हमारी कहानी अधूरी रह गई।
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